गुरुवार, 30 अगस्त 2007

तकनीकः माइक्रोसॉफ़्ट ने निकाली नयी तकनीक (वन केयर )

नोटः ये खबर हमारी तेज निगाहों का परिणाम है कहीं से चुरायी हुई नहीं है.

क्या पिछले कुछ दिनों से हॉटमेल यूज करने वालों को डिस्प्ले बार में नया दिखायी दिया? नहीं यां आपने गौर नहीं किया है.इसमें माइक्रोसॉफ़्ट की >होम,हॉटमेल,स्पेसेस और वन केयर हैं.










वन केयर! जी हाँ ये माइक्रोसॉफ़्ट की एक उच्चस्तरीय तकनीक है किसका भविष्य में यां शायद अब भी कोई सानी नहीं होगा. मैं ये मजाक नहीं हकीकत कह रहा हूँ.

अब इतनी देर से पका रहा हूँ तो चलो बता ही देते हैं, दर-असल में ये मैक्रोसॉफ़्ट का ऑनलाइन पी.सी. स्कैनर है जो उच्चस्तरीय है. ये कुछ ही समय में आपके सिस्टम को स्कैन करके उसे वायरस फ़्री कर देता है, है न कमाल की बात.

ये सब माइक्रोसॉफ़्ट फ़्री में दे रहा है. अब लगता है कि संचार जगत में इससे अच्छी बात क्या होगी कि एन्टी-वायरस खुद घर चलकर आ रहा है

इसमें प्रोटेक्शन, डिस्क क्लीन्-अप और ट्यून-अप सुविधायें अलग-अलग दी हुई हैं

1. प्रोटेक्शनः ये आपकी सिस्टम की सुरक्षा के लिये है (किसी कारणवश न चले तो शायद कोई एन्टी-वायरस आपके सिस्टम में है यां तकनीकी समस्या है)
2. क्लीन अपः ये आपके सिस्टम में मौजूद बेकार के कचरे को हटाता है यकीन मानिये ये कारगर है
3. ट्यून-अपः ये सिस्टम की हार्ड-डिस्क को फ़्रैगमेन्ट करता है,यानी उसे सही रूप मे परिवर्तित करके तेज गति से चलने लायक करता है, ये भी कारगर है.

तो भाई लोगों अब एन्टी-वायरस के खरीदनें के पैसे बच गये. ना!

बुधवार, 29 अगस्त 2007

उफ़! मेरे आगरा को किसकी नजर लग गयी?

आज सुबह-सुबह मेरा आगरा शहर तनाव में आ गया,क्योंकि शहर की फ़िजां खराब हो चुकी थी.
चार लोगों की मौत के बाद जब हंगामा होते-होते पहले तोड्फ़ोड् फ़िर लूटपाट और फ़िर दंगे के रूप मे हो लिया तो शहर दहशत में आ गया.

पुलिस और प्रशासन बेजान बने रहे और जब तमाशा खत्म होने लगा तो कर्यवाही करने के लिये कुछ बचा ही नहीं था.

हमारे "हिन्दुस्तान" अखबार के फ़ोटोग्राफ़र्स {डी.के.शर्मा और रनविजय सिंह) ने कुछ तस्वीरें हमें दी है तकि मैं अपने आगरा का दर्द बाँट सकूँ.

एक के बाद एक करके सोलह ट्रकों को आग लगा दी गयी












जिसको जो मिला वो उसी ने लूट लिया















बस बचा तो अराजकता का माहौल




ब्लॉग पेज को कैसे सजायें : भाग 1

पहला कन्टेंट
मरकी स्क्रौल
मरकी स्क्रौल ये भी बढिया है आजमाकर देखेंगें ?

इसे आप टेम्पलेट ऑप्शन में जाकर एड-ए-पेज-एलिमेंट में एच.टी.एम.एल/जावा स्क्रिप्ट ऑप्शन में जाकर इन कोड्स को पेस्ट कर दें.

सुविधानुसार कहीं यां ऊपर नीचे रख सकते है










नीचे दिख रहे कोड को पेस्ट करें यां हूबहू वैसा ही लिखें. जहाँ >TEXT< लिखा है वहाँ अपना संदेश लिखें
अपना संदेश लिखना ना भूलें!
हर स्टाइल के लिये अलग अलग कोड हैं

सोमवार, 27 अगस्त 2007

सभी ब्लॉगरों के लिये तोहफ़ा मेरी तरफ़् से

आज से मैं अपने तकनीकी पक्ष को भी अपने साथियों के बीच शेयर करूंगा,क्योंकि अगर सुविधायें हैं तो उसका इस्तेमाल भी होना चाहिये जिससे भविष्य में मेरे साथियों को अपना ब्लॉगपेज महत्वपूर्ण लगे.

ये सभी गैजेट्स उपयोगी है और इसकी श्रेष्ठता सिध्द भी हो चुकी लेकिन अब हमें इसका हिन्दी चिट्ठाकारी में भी प्रयोग करेंगें ये मेरा मानना है.

ये करीब साढे तेरह हजार के करीब गैजेट्स हैं जो किसी के लिये भी काफ़ी हैं
ये सभी काम के गैजेट्स है जैसे ऑनलाइन टी.वी.,यू-ट्यूब,गूगलटॉक,चैटिंग,आई.पी. नॉउ याहू मैसेन्जर,भागवत गीता,गेम्स,गूगल अर्थ आदि........
इस लिंक पर क्लिक करें
http://www.google.com/ig/directory?synd=open

रविवार, 26 अगस्त 2007

भगदड़् का पहला शिकार

अभी मैने ठीक से पाँव पसारे ही नहीं थे कि मुझे अपने भगदड़् वाले अंदाज मे लिखने को बाध्य होना पडा. क्योंकि हमें एक मुद्दा मिल गया था और हम उसका श्रीगणेश करना चाहते थे सो हमने भी तपाक से ढंढोरची जी की पोस्ट को लपक लिया और फ़ेंक दिया भगदड़् में अब आगे क्या होगा पता नहीं!

तो आईये सीधे चलते है लाइव टेलीकास्ट में
यहाँ नीचे लिंक दिया हुआ है
http://bhagdar.blogspot.com/2007/08/blog-post_5530.html

भगदड् : अब हम भी जुड् गये हैं


आज किसी अनामदास ने हमें इस ब्लॉग पर पहली पोस्ट लिखने के लिये आमंत्रित किया तो हमें लगा शायद ये नाम और ब्लॉग हम जैसे लोगों के लिये ही बनाया हुआ है जो किसी भी विवाद को तब तक जारी रख सकते है जब तक उसका उचित हल ना निकले।

साथ ही साथ हमारे साथियों ने भी इसे हाथों-हाथ लिया है क्योंकि वो सभी लोग भी एक अलग सार्थक मंच चाहते थे।

अब ये मंच आगे क्या गुल खिलायेगा ये आगे चलने पर ही पता चलेगा।

ये रहा भगदड् का लिंक

मेरी शुभकामनायें
कमलेश मदान

शनिवार, 25 अगस्त 2007

"हिन्दी चिट्ठाकारी दुनियां में आपका स्वागत है"

ये शब्द सुनने को भले ही अच्छे लगते हैं लेकिन हिन्दी के शीर्ष फ़ीड-एग्रीग्रेटरों जैसे- नारद.अक्षरग्राम,चिट्ठाजगत और ब्लॉगवांणी,याहू 360 को अपने वेबसाईटस् को हिट करने और उसकी झूठी रैंकिंग को प्रदर्षित करने के अलावा और बाकी कार्य का समय ही नहीं है.

हो सकता है मेरी ये बातें सभी लोगों को बुरी लग रहीं हैं लेकिन क्या कभी भी इन्होने सोचा है कि बेकार के वाद्-विवाद् को आगे बढाने से यां अश्लीलतपन लिये भौंडे लेख जिसे हमारे कुछ बुजुर्ग लेखक आज का सच दिखाकर खुश हो रहे हैं क्या वो अपनी श्रेष्ठता साबित करना चाहते हैं.

1.कल मसीवजी (क्षमा चाहता हूँ नाम देने के लिये ) ने एक लेख लिखा था कि हिन्दी ब्लॉगरों को नौकरी कब मिलेगी?
मेरा जवाब है अगर लेखन का स्तर ऊँचा होगा और ओछेपन से परे होगा तो नौकरी क्या हिन्दी ब्लॉगजगत खुद एक व्यवसाय होगा।

2.अहमदाबाद के एक महाशय हैं जो खुद एक शिक्षक हैं लेकिन उनकी शिक्षा केवल रतिक्रीडायें और नारी शरीर के व्यख्यान पर ही टिक जाती हैं ये हैं डॉ सुभाष भदौरिया जो आजकल विवाद बने हुये हैं मेरे पिछले चिट्ठे पर उन्होने टिप्पणी की थी कि क्या मुझे उनके द्वारा लिखी गयी कवितायें नहीं दिखती?

उनको भी मेरा जवाब है कि आप वरिष्ठ हैं लेकिन जो आप शिक्षा अपने विधार्थियों को देते हैं क्या वो इसी तरह की होती है? क्या आपको सरकार ने यौन-शिक्षा के लिये फ़्री लाइसेंस दिया हुआ है? यां आप किसी मानसिक प्रवत्ति के शिकार हैं जो औरतो,लड्कियों के शरीर को अपनी अभिव्यक्ति द्वारा ब्लॉगजगत में तहलका मचान चहते हैं.
आपको मेरी ये सलाह है कि पहले आप यह तय कर लें कि हिन्दी ब्लॉगजत जो हिन्दी के प्रचार प्रसार में निरंतर प्रयासरत है वो आपके इन नापाक कदमों को आगे नहीं बढने नहीं देगा अतएव् आप किसी अन्ग्रेजी ब्लॉग्स यां किसी अश्लील वेबसाईट यां किसी जासूसी नॉवल के लिखें आप जरूर सफ़ल होंगें. ये मेरा दावा है.


अब बात काम की....
मैं छोटा हूँ लेकिन कम से कम मैं हिन्दी चिट्ठा जगत के व्यस्थापकों से यह अनुरोध तो कर सकता हूँ कि वो मेरी कुछ बातों पर अमल करेंगें।

1. किसी भी विवाद को आगे ना बढाया जाये जो अनुचित हो.
2. नारी देह के लिये लिखने वालों पर अंकुश हो ताकि हिन्दी चिट्ठाजगत अपनी गरिमां बनाये रखे.
3. सभी फ़ीडएग्रीग्रेटर एकमत हों कोई भी रैंकिंग के चक्कर में ना पडें तो बेहतर होगा इससे सबकी छवि बेहतर होगी और नये लेखक लिखने के लिये प्रोत्साहित होंगें
4. वरिष्ठ लेखकों से नये लेखकों के स्वागत की अपेक्षा सभी को रहती है अतः ऐसी परंपरा बने
5. नियम यां कानून सबके लिये बने कोई छोटा यां बडा ना हो चाहे वो खुद वेबसाईट के संचालक ही क्यों ना हों


मेरा ये प्रयास हिन्दी चिट्ठाजगत में फ़ैलती अश्ललीलता और अनर्गल लेखन का प्रतिरोध हैं अगर कोई बात बुरी लग रही है तो मेरा फ़ोन नं दिया हुआ है

शनिवार, 18 अगस्त 2007

सी.डी. को हुये 25 साल


'दुनियाभर में संगीत और कंप्यूटर डेटा को सुरक्षित रखने के क्षेत्र में क्रांति लाने वाली कॉम्पैक्ट डिस्क यानी सीडी ने अपने आविष्कार के 25 साल पूरे कर लिए है.'

जर्मनी में फ़िलिप्स और सोनी कंपनियों ने 25 साल पहले संयुक्त रुप से पहली सीडी बनाई थी. तब से अब तक दुनिया भर में लगभग 200 अरब सीडी बिक चुकी हैं.
डिज़िटल डाउनलोड की आधुनिक तकनीक के दौर में डेटा संरक्षण के क्षेत्र में सीडी को महत्वपूर्ण स्थान हासिल है.
डिस्क के विकास के समय फ़िलिप्स में ऑप्टिकल समूह के सदस्य रहे पीट क्रेमर ने कहा, "25 साल पहले सोनी के साथ सीडी के विकास के समय हमारा पहला लक्ष्य सीडी को दुनियाभर में लोकप्रिय करना था."
उन्होंने कहा कि कंपनियों को कतई उम्मीद नहीं रही होगी कि कंप्यूटर और मनोरंजन जगत डेटा संरक्षण के लिए सीडी को इस बड़ी मात्रा में प्रयोग करेंगें.

संगीत जगत में क्रांति

दोनों कंपनियों ने 1979 में सीडी में और सुधार के लिए काम करना शुरू किया. उनका उद्देश्य एक घंटे का ऑडियो रिकार्ड करने वाली सीडी बनाना था. फिर 74 मिनट तक रिकार्ड क्षमता वाली सीडी विकसित की गई. फिर धीरे-धीरे संरक्षण की क्षमता बढ़ती ही गई.

बिक्री के लिए पहली सीडी बाज़ार में 1982 में आई जो प्रमुख रूप से संगीत की दुनिया में रिकार्डिंग के लिए उपयोग की गई.
उस समय उसकी क़ीमत लगभग 2000 डच गिल्ड थी जो आज के 1000 पाउंड के बराबर है.
पॉलीग्राम सीडी डेवलपमेंट टास्क फ़ोर्स के सदस्य रहे फ़्रेंक वान डेन बर्ग ने बताया, "चिली के मशहूर पियानो वादक क्लाडियो
अरायू की रिकार्डिंग जब सीडी पर हुई तो हम लोग इसकी इतनी स्पष्ट आवाज़ से चकित से रह गए थे."
हालाँकि डिज़िटल उत्पादों की वजह से पिछले 10 सालों में सीडी की बिक्री में गिरावट आई है.

इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ फ़ोनोग्राफ़िक इंडस्ट्री के मुताबिक़ 2010 तक डिज़िटल उत्पादों का संगीत की दुनिया के एक चौथाई बाज़ार पर क़ब्ज़ा होगा.