बुधवार, 28 जनवरी 2009

मेरा देश : गली,मोहल्ले, कॉलोनी और सोसाइटी और अब टाउनशिप की वैराइटी वाला गणतंत्र दिवस कैसे मनाया जाता है? आइये जानें

पहला सीन - एक तंग गली में कुछ बच्चे जो मैले कुचैले फ़टेहाल कपड़ों में कचरा बीन रहे हैं,कुछ सुअर साथ दे रहे हैं और कुछ कुत्ते उनकी पहचान को सार्थक बना रहे हैं.
इस गली के आखिरी छोर पर एक लड़की भीख मांगने का नाटक करते हुये अपने जिस्म के खरीददार को खोज रही है तो सामने से ही उसका नशेड़ी बाप उसे गालियाँ देते-देते नाली की कीचड़ में सरोबार होकर उसी में लोटपोट है

दूसरा सीन- मोहल्ले में आज दो औरतें रोज की तरह एक दूसरे को गालियां दे रही हैं, तो वहीं कुछ बच्चे कंचे और गिल्ली डंडे में व्यस्त हैं, अल्हड़ लड़कियाँ जानबूझकर छत पर बाल सुखाने को चली आयी हैं और उन्ही को देखने मोहल्ले के "नामी" नौजवान अपनी बाइक और किसी न किसी बहाने से इन घरों में तांक-झांक कर रहे

तीसरा सीन- शहर की पॉश कॉलोनी में आज सुबह से ही हलचल है....
कुछ पढे-लोखे बुजुर्गों ने सांस्क्रतिक कार्यक्रम आयोजित किये हैं जिसमें क्षेत्र के ही किसी छुटभैये नेता(गुंडे) को बतौर चीफ़ गैस्ट बुलाया गया है...
बच्चे जो अपनी-अपनी मम्मियों के साथ आये हैं और मन मारकर ह्रितिक-रोशन और राखी सावंत के आइटम नम्बरों पर पैर पटक-पटक कर स्टेज को तोड़े जा रहे हें

इन सबके बीच लड़कियां अपने-अपने मोबाइल फ़ोन्स पर अपने-अपने ब्वाय-फ़्रेंडस के साथ बातों में मशगूल हैं, किसी का मॉल तो किसी का पिक्चर देखने का प्रोग्राम फ़िट हो चला है

अब बारी सोसाइटी की ये सीन बिल्कुल ही डिफ़रेंट हैं इस लिये इसे कोई क्रम नहीं दे सकता-- तो सीन इस प्रकार है कि आज सोसाइटी की महिलाओं की किटी पार्टी है जिसमें आज फ़लां श्रीमती ने आयोजित किया है, कारण चाहे जो कोई भी हो आज गणतंत्र दिवस और अपने सारे पड़ोसियों को अपनी नयी ज्वैलरी और नया फ़र्नीचर जो दिखान है....
हाँ शाम को एक अनाथालय में जाकर कुछ फ़टे कपड़े दान देते हुये अपनी महिला संगठन का अखबार में महिमा-मंडन सहित चित्र छपवाना है

क्या कहा बच्चे और लड़कियां?
बच्चे तो अपने-अपने स्कूल में गये हैं मजबूरीवश लेकिन लड़कियों के लिये सोसाइटी के बाहर काले रंग के शीशे ऊपर किये हुये चमचमाती कारें इंतजार कर रही हैं,


इन सबके बीच शहर के बाहर बनी टाउनशिप में एकांत का वातावरण है इन सबमें गली-मोहल्ले-कॉलोनी-सोसाइटी से पटायी,बहलायी,फ़ुसलायी,मजबूरी मे बुलायी गयी लड़कियां अपने-अपने जोड़ीदारों के साथ गणतंत्र-दिवस को इंज्वाय कर रहे हैं,और इनके जोड़ीदार वो पति-लड़्के हैं जो अपने-अपने गली-मोहल्ले-कॉलोनी और सोसाइटियों से अपने घरवालों-पत्नियों से दूर हैं

सोमवार, 10 नवंबर 2008

ब्लॉगर शब्द का हिन्दी नामकरण क्या हो सकता है? इसे जनमानस तक पहुँचाने के लिये कुछ आसान और बढिया शब्द बताइये!

आज रवीश जी ने एक अलग ही विचार प्रकट किया है जो उचित है ब्लॉगर को फुटबॉलर कहें, यकीनन उनके मन में उपजी इस बात को कई लोगों ने समझा होगा यां नहीं लेकिन ये सच है कि ब्लॉगर और चिट्ठा और पत्रकार के बीच की खाई को पाटने के लिये हमें कोई विकल्प तलाशना होगा जो दर्शित करे कि वो इंटरनेट पर हिन्दी में लिखने वाला प्राणी है जिससे ब्लॉगिंग यानी कि चिट्ठाकारी जनमानस तक पहुँच सके.

मेरा अनुरोध है कि हिन्दी के शीर्ष दिग्गज जैसे बेंगाणी बन्धु,समीर,प्रमोद जी,काकेश जी,द्विवेदी जी,पांडेय जी,अनूप जी,मैथिली जी,रवीश जी,रंजना जी,रचना जी,अरून अरोरा जी और मेरे सभी प्रिय ब्लॉगर भाई-बहनों से ये निवेदन है कि वो सब इस काम में आगे आयें और एक प्रतियोगिता ही आयोजित कर दें

बुधवार, 5 नवंबर 2008

मेरा देश प्यासा है और आप गंगाजल को बचाने में लगे हुये हैं

ये सवाल मैं नहीं आज लगभग देश का हर नागरिक सोच रहा है क्या वाकई में गंगा को बचाने के लिये देश के प्रधानमंत्री इस कमेटी के अध्यक्ष होंगे ? अगर जवाब हाँ है तो उनके कार्यकाल के बाद क्या अगले प्रधानमंत्री को ये सब कार्य करने की सुध रहेगी ? क्या राज्यों के मुख्य मंत्री गंगा बचाने की मुहिम में अपने लिये गंगा का अधिकांश जल मांग उठे तो...?

और तो और गंगा नदी तो एक अविरल धारा है लेकिन लुप्त होती नदियों के बारे में क्या होगा ? क्या दिल्ली में मेट्रो रेल के अध्यक्ष श्रीधरन जी यमुना को नाला बनाकर छोड़ देंगें ? क्या ब्रहमपुत्र नदी के अस्तित्व को चीन जैसे देशों से खतरा है?

ये तो कुछ सवाल हैं जो मेरे जेहन में हैं लेकिन क्या देश की इन नदियों के बारे में हमारे देश के प्रधानमंत्री जी को भी चिंता है जो इस लिस्ट में दी हुयी है ?

अरे अभी जाइये मत! आगे भी सुनिये... क्या आपके आसपास बढते वैश्वीकरण से आपको क्या नुकसान हो रहा है तो देख लीजिये कहीं आपके आस-पास किसी बिल्डर नें किसी तालाब यां पोखर को मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में तो नहीं बदल दिया ? यां आपके शहर की नदियों से बालू उत्खनन तो नहीं हो रहा है ? जवाब यदि हाँ है तो आपका शहर और नदी दोनों खतरे में है.

पहले वाटर लेवल 70-80 फ़ुट था अब 250-300 फ़ुट हो गया है ? सरकारी नल के पीने के पानी में बदबू आ रही है नि:सन्देह वो पानी शहर के नालों को साफ़ करके पिलाया जा रहा है.
अब आगे की एक और कहानी विदर्भ और बुन्देलखंड में जाकर देख सकते हैं, बाकी हमारे देश के प्रधानमंत्री और उनकी सलाहकार कमेटी को जो दिखायी देता है वो सरमाथे पर !

गुरुवार, 30 अक्टूबर 2008

राहुल राज का कदम भगत सिहं सरीखा था

मुम्बई बेस्ट एन्काउंटर में मारे गये राहुल राज ने न केवल खुद को इस देश की गन्दी राजनीति की आग में झोंक दिया बल्कि मुझे लगता है कि उसने खुद ये काम अपनी प्रेरणा से दूसरों को आगे आने के लिये किया क्योंकि जिस तरीके से ये काम उसनें किया वही तरीका भगत सिंह नें असैम्बली में बम फ़ेंक कर किया था, आज हर उत्तर भारतीय के मन फ़ैले डर को उसने खत्म किया है और पैदा किया है एक नयें जोश को जो आने वाले समय में महाराष्ट्र और देश के लिये घातक भी हो सकता है
शायद ठाकरे परिवार और सरकार ये भूल चुकी है कि उत्तर भारतीयों की बदौलत वो कमा-खा रहे हैं वरना इन महानगरीय परिवेश में रहने वाले आलसी जीवों से पूछकर देख लो कि कौन इनकी मजदूरी से लेकर आई.टी.,फ़िल्म जगत और प्रशासनिक सेवायें सम्हाले हुये है

बस अब आगे लिखने का तात्पर्य सभी समझदार लोग समझ चुके होंगे इसीलिये अब "बॉयकाट मुम्बई" का नारा लगाने का वक्त हो चला है

मंगलवार, 14 अक्टूबर 2008

अविनाश बाबू आपको अभी भी शर्म नहीं आती?

आज फ़िर से शर्मसार करते हुये अविनाश नें एक व्यक्तिगत पत्र को फ़िर से सार्वजनिक कर दिया है जो निंदनीय है और शायद अविनाश बाबू की रगों में बहते नापाक इरादों का फ़ल , क्योंकि इन्होने एक सीधे-साधे इंसान का सार्वजनिक रूप से अपमान किया है.

श्री सुरेश चंद्र गुप्ता जी के ब्लॉग और पत्र के जवाब में उन्होने जो अशोभनीय हरकत की है वो जगजाहिर है कि वो अपनी करतूतों से बाज नहीं आयेंगे, उस पर तुर्रा ये कि अपने ही चिट्ठे पर अनाम टिप्पणियां भी तुरंत आनन-फ़ानन में कर दी ताकि इनके कुत्सित विचारों को हवा लग सके, बल्कि ये नहीं जानते हैं कि टिप्पणी की भाषा शैली शुध्द अविनाश शैली है.

पहले भी कई विवादों को जन्म और फ़िर ब्लॉगजगत में अफ़रा-तफ़री मचाकर और खिसियाकर चुप होकर बैठ जाना और फ़िर अब नया बावेला खड़ा करने का मकसद ज्यादा हिट और लाइमलाइट में आना ही है, सब जानते हैं कि आप प्रशंसा के भूखे हैं लेकिन ओछी! अपनी नीच और बिना औचित्य की लड़ाई को किसी सार्थक रूप में लड़िये तो ये हिंदी ब्लॉगजगत आपके साथ है.


आपका छोटा भाई

कमलेश मदान

शनिवार, 11 अक्टूबर 2008

बिना एंटी-वायरस के अपने यू.एस.बी. ड्राइव को कैसे क्लीन करें यानी वायरस रहित

मैने पिछली पोस्ट में बताया था कि बिना एंटी-वायरस के नेट-सर्फ़िंग कैसे करें जिसे आप लोगों ने सराहा! अब जानते हैं कि यू.एस.बी. में मौजूद वायरस को कैसे हटायें?

जैसा कि आप जानते होंगे कि 90% वायरस यू.एस.बी. और सी.डी.ड्राइव से फ़ैलते हैं ये सब एक प्रोग्राम यानी वायरस जनरेट करते हैं और आपका कम्प्यूटर दूषित होता चला जाता है.

इन वायरसों में एक सबसे खराब बात होती है कि वो ऑटो-रन यानी खुद ब खुद चलने वाले प्रोग्राम होते हैं, अब न तो इन वायरस को रोका जा सकता है और न फ़ैलने से बचाया जा सकता है.

लेकिन अब मैं आप सबको एक ऐसा सॉफ़्टवेयर दे रहा हूँ जिससे इन ऑटो-रन और करीब 99% वायरस के प्रोग्राम पर अंकुश लगा सकते हैं.

इस सॉफ़्ट्वेयर को आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं.

कैसे इंस्टाल करें--
अन-जिप करने के बाद आप सेट-अप को रन कर लेंफ़िर क्रेक फ़ोल्डर में से क्रेक फ़ाइल उठा लें फ़ोल्डर उपर के चित्र में दिखायी दे रहा है और क्रेक फ़ाइल नीचे के चित्र में दिखायी दे रही है
अब इसे C:\Program files\USB Disc Security फ़ोल्डर में रिप्लेस कर दें. आपका सॉफ़्टवेयर कार्य करने के लिये तैयार है.

एक जरूरी बात- इसके अलावा आप सभी को यह ध्यान रहे कि यू.एस.बी. एवं सी.डी. रोम को खोलने से पहले उसे राइट क्लिक करके एक्सप्लोर करके ही खोले जिससे अनावश्यक रूप से ऑटो रन पर क्लिक करने से बच सकते हैं.

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2008

क्या बिना एंटी-वायरस के सेफ़ इंटरनेट ब्राउजिंग संभव है?

यकीन नहीं होता ना! लेकिन ये मैने संभव किया है क्योंकि मैं पिछले छः माह से बिना एंटी-वायरस के कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहा हूँ और वो भी बिना किसी नुकसान के.

अब कैसे संभव हुआ ये जानते हैं.....

सबसे पहले मैने फ़ायर-फ़ॉक्स का एक पुराना वर्जन डाउनलोड किया वर्जन है 2.0.0.11 ये इसका एक अच्छा वर्जन है जो सारे के सारे प्लग-इन और स्पीड के साथ चलता है.

अब डाउनलोड करने बाद इसके ऑप्शन में जायें जो टूल्स मैन्यू में है, ऑप्शन में पहला टैब है मेन इसमें चाहे तो आप ब्लैंक पेज यानी खाली पेज भी रख सकते हैं


अब इसके तुरंत बाद प्राइवेसी टैब में आ जाते हैं जो इसका एक बहुत अच्छा ऑप्शन है

इसमें आप चाहें तो अपने काम को रिमेम्बर यानी कि याद भी रख सकते हैं

ठीक इसके नीचे कुकीस का ऑप्शन है जो आप चाहें रखें यां न रखे आपकी मर्जी

अब बारी है इसके एक महत्वपूर्ण हिस्से की यानी कि प्राइवेट डाटा टैब की . इसमें पहले ऑप्शन को चैक करें दूसरे ऑप्शन को चैक करने से हर बार आपके डाटा को खाली करने के लिये ये पूछता रहेगा जो कि एक तंग करने वाला काम है
इसमें सैटिंग्स का एक बटन है जिसमें आप क्लिक करके हर वो डाटा आप ऑटोमैटिकली क्लियर कर सकते हैं जिसकी आपको जरूरत नहीं जैसे कि कुकीस,सैशन,हिस्ट्री,वेब-फ़ॉर्म आदि..

ये तो रही इसकी खूबियां लेकिन अब जानते हैं कुछ खास इस फ़ाय-फ़ॉक्स के बारे में.....
अब इसी टूल्स ऑप्शन में एड-ऑन्स नाम का एक बटन आता है आप क्लिक करिये फ़िर इस तरह का बॉक्स खुलेगा आप उसमें गैट-एक्सटेंशन्स पर क्लिक क्रेंगे तो एक वेब पेज खुल जायेगा




बस अब आप इस वेब पेज में सर्च के ऑप्शन में ये लिख दीजिये add block और फ़िर इसको एड कर लिजिये फ़िर एक और जरूरी प्लग-इन wot को भी ढूंढ लीजिये और फ़िर डाउनलोड होने के बाद ये रिस्टार्ट मांगेगा. लीजिये तैयार है रिस्क-फ़्री इंटरनेट सर्फ़िंग

एड-ब्लॉक प्लस फ़ायरफ़ॉक्स का एक अचूक हथियार है इसके आते ही किसी भी वेबपेज की सारी की सारी प्रचार सामग्री प्रतिबन्धित हो जायेगी और कोई भी पॉप-अप एड भी नहीं आयेगा ये आप इस रैडिफ़.कॉम के मुख्य-प्रष्ठ पर भी लागू है



आप चाहें तो किसी भी एड चाहे वो चित्र हो यां वो कोई फ़्लैश एनीमेशन भी हो आप ब्लॉक कर सकते है.


अब बारी है WOT यानी Web Of Trust ये एक ऐसी वेबसाइट और प्लग-इन का नाम है जिसमे कोई भी वेब एडरेस टाइप करने के बाद उसका काम है उस वेब-पेज और वेबसाइट के बारे में सही जानकारी देना अगर बटन हरा है तो समझिये कि पेज और वेबसाइट भरोसेमंद हैं

यदि पीला है तो समझिये कि नुक्सान की संभावना है और लाल होने पर ये स्वतः ही पेज को रोक देगा और वार्निंग देगा. देखिये गूगल खोलने पर क्या दिखायी दिया



अब शुरू कीजिये एक स्वस्थ और सुरक्षित सर्फ़िंग.

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2008

अतुल्य भारत - मेरी यात्राओं से (भाग -दो)

पिछले भाग में मैने कुछ तस्वीरें और कुछ संछिप्त परिचय दिया था अपनी पिछली चार माह के गायब रहने का कारण सहित.
अब कुछ फ़ुर्सत है और लिखने का उचित समय भी तो हाजिर है भाग-दो
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मेरी यात्राओं में बहुत से पड़ाव और शहर,गाँव आये .. गौरतलब बात यह है कि मैने ये यात्रायें दुपहिया वाहन से कीं.

प्रमुख शहर जिनसे होकर गुजरा और उनको देखाः- कासगंज,बदायूँ,एटा,बरेली,रामपुर, देहरादून,ग्वालियर,डबरा,दतिया,झाँसी,भोपाल-होशंगाबाद,
और आगे हजारों गाँव और देहात कस्बे ये सब केवल अकेले सिर्फ़ अकेले
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कुछ बाते अपने देश के किसानों की--
मैने पूर्वी उत्तर-प्रदेश के किसानों के पास एक उन्नति का पथ खोजा जो उन्होने संपूर्ण विकसित कर लिया है. कैसे!

साल भर की तीन महीनों की फ़सल में किसान क्या कमाते थे अतः उन्होने उस फ़सल के साथ-साथ नयी-नयी फ़सलें भी उगाना शुरू कर दिया है जिससे उन्हे इतना मिल जाता है कि वो अपना गुजारा एक ही फ़सल में निकाल लें. किसानों ने पिपरमेंट,कमल-ककड़ी,खुंबियां और तिल के साथ साथ अनेक बेमौसमी फ़ल और अनाज उगाना शुरू कर दिया है.

तो वहीं अब खुशी होती है कि आज पाठशालाओं में शिक्षा देने स्वयंसेवी संस्थायें और स्कूल-कॉलेज भी आगे आने लगे हैं. मैने बहुत से ऐसे परिवार् भी देखे जिनमें लड़कियां तो पढ रही हैं लेकिन लड़के खेती-मजदूरी कर रहे हैं.

प्रस्तुत है कुछ तस्वीरें ---
ये टेम्पो तो जाना पहचाना सा लगता है
अजान का वक्त हो गया!देखो आवाज आ रही है

भाई! इस बारिश में कहाँ जायेंगे?



और आगे विस्तार से अलग -अलग विषयों पर लेख लिखूंगा....क्रमशः