मंगलवार, 30 अक्टूबर 2007

आइये नारद.अक्षरग्राम को बचायें!

सुनकर अटपटा लगा ना ! कभी हम चिट्ठाकार नारद पर अपना चिट्ठा अवतरित होने के लिये लालायित रहते थे कि कब ये चिट्ठा आये और कब हमारा चिट्ठा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे पर आज मुझे महसूस हो रहा है कि ये प्रमुख हिन्दी एग्रीग्रेटर जिस तकलीफ़ों के दौर में गुजर रहा है वो शायद अन्य एग्रीग्रेटर भी देख रहे व सुन रहे हैं लेकिन उन सबको नारद से क्या लेना-देना...

पीपुल ऎंड थिंग्स (एस एम एस )

पहली बार एक एस.एम.एस. मिला जो कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह गया, इस एस.एम.एस. ने मुझे वाकई में सोचने को मजबूर कर दिया कि वाकई में ऐसा है।एस.एम.एस. में लिखा था जो अंग्रेजी में है.:" People are made to be loved and thing are made to be used. but Confusion is in the world, Becouse people are being used and things r being Loved !! "ये बात काफ़ी गहराई से कम शब्दों मे कही गयी है कि आज इंसान जिस...

रविवार, 28 अक्टूबर 2007

चलो हरामखोर हो जाएं (व्यंग्य)

हरामखोरी.: ये एक शब्द किसी डिक्शनरी में नहीं मिलता बल्कि ये क्वालिटी विरले ही मिलती है.जिसे घूस,रिश्वत,आलस और सच्चे अर्थों में देश-सेवा का कीड़ा काटा हो वो हरामखोर बनने का सही हकदार है,यां ये कहिये कि एक हरामखोर ही देश की सच्ची सेवा करने और विकास की प्रगति का सही उम्मीदवार है. हरामखोरी से कई फ़ायदे हैं....नीचे देखें .:1:. जैसे कोई बेचारा मर्डर...

शनिवार, 27 अक्टूबर 2007

तस्वीरें जो बोलती हैं!

आज मैं भारत की कुछ तस्वीरें पोस्ट कर रहा हूँ लेकिन इन तस्वीरों में जो भारत मुझे दिखायी दिया है उसने मुझे काफ़ी हद तक दुख भी दिया है और कुछ सुखद अनुभूति भी दी है.इन तस्वीरों को देश के जाने-माने छायाकारों(फ़ोटोग्राफ़रों) ने खींचा है जिसका मुझे कोई क्रेडिट नही चाहिये बस! आप लोग देख सकें ये ही बड़ी बात है।मैं तो चाह रहा था कि हर चित्र के उपर एक ब्लॉग...

रविवार, 21 अक्टूबर 2007

हम हिन्दुस्तानी (द्वित्तीय भाग)

कभी-कभी इंसान गल्तियां कर बैठता है और कल गलती से मिस्टेक करते हुये जो हमने अपने देशप्रेमी होने की जो मिसाल कायम की थी वो वाकई में गंभीर विषय बन चुका है, काफ़ी लोगों ने हमें इसे आगे जारी रखने का सम्मन भी भेज दिया है तो भाई लोगों प्रस्तुत है हम हिन्दुस्तानी का भाग दो..नकलः ये हुनर तो हम हिन्दुस्तानियों की वो अमूल्य धरोहर है जिसे संजोये रखनें से ही विकास का पहिया तेजी से घूम रहा है यां ये कहिये...

शनिवार, 20 अक्टूबर 2007

हम हिन्दुस्तानी

पढनें में अजीब लग रहा होगा लेकिन आम हिन्दुस्तानियों की जो आदतें है वो किसी भी दूसरे देश के लोगों के लिये ईर्ष्या का विषय है, कम से कम मैं तो यही समझता हूँ,आप क्या समझते है अपनी राय टिप्पणी के रूप में दें|ये कुछ खास विशेषताऐं हैं जो हमें अपने अपने हिन्दुस्तानी होने के एहसास को जोड़े रखती हैं, तो चलो आइये देखें कि आखिर क्या हैं ये.....अखबारः इसका पढनें का मजा सिर्फ़ मांगकर पढने में ही है, जब...

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2007

मेरे इस ब्लॉग के लिये आप प्रोत्साहन दें तो अच्छा लगेगा

आज से विधिवत मैने हिन्दी विकिपीडिया और अपने ब्लॉग मातृभूमि के लिये अपना योगदान देना शुरू कर दिया है.लेकिन उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के बिना अधूरा है ये ब्लॉग अतः आप सभी लोगों के सहयोग के लिये मैं प्रतीक्षारत हूं इसलिए आप सबके विचार और सुझावों का स्वागत है|तकनीकी रूप में चिट्ठाजगत और ब्लॉगवानी ने इसे अभी पंजीकृत नही किया है जबकि चिट्ठाजगत के लेबल मैने दो बार और ब्लॉगवानी के लिये मैने...

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2007

क्या कूल हैं हम

ब्लॉगिंग से सावधान!कहीं घरवाले ये हाल ना कर देंपापा कहते हैं बड़ा नाम करेगाआज ना छोड़ूंगा तुझेचलो आज गाड़ी ही ठीक कर देंदेखा मेरी गाड़ी कितनी तेज हैये तेरी ऑखें झुकी-झुकीआज कुछ ज्यादा ही चढ गयी हैक्या लाइटर हैमेरी बंदरिया को तूने छेड़ा..आजा मेरी गाड़ी में बैठ जातूने मेरी चॉकलेट क्यों खायी?मम्मी अब शैतानी नहीं करूंगाओह! मेरा टाइटेनिक डूब रहा...

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2007

आलोक पुराणिक जी! कम से कम अपनी जन्मस्थली की बुराई तो न करिये

आज सुबह ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के ब्लॉग पर आगरा के बारे में पढकर अच्छा लगा किन्तु साथ ही साथ आलोक पुराणिक जी के कमेंट देखकर दुख भी हुआ, उनके कमेंट में एक ओर जहाँ आगरा के प्रति उनकी निराशावादिता झलक रही है तो दूसरी ओर उनका आधुनिक होना भी निराश करता है क्योंकि आधुनिकता की जिस बयार में वह बह रहे हैं उसमें उन्होने अपनी तुलना मीर गालिब जैसे महान...