बुधवार, 23 मई 2007

बदलते भारत की एक भयावह तस्वीर

Posted on 5:26:00 pm by kamlesh madaan

वित्तमंत्री से लेकर रेलमंत्री,अमेरिका से लेकर पूरी दुनियां भारत की उन्नति के बडे-बडे झूठे दावे करते हुये अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं,लेकिन् यह सच नहीं कि हम जिस दौर से गुजर रहे हैं शायद अब समय आ गया है कि हमें अपनी सरकार के समक्ष उनकी विफ़लताओं का आईना दिखाना होगा।


बढ्ती बेरोजगारी,अव्यवस्था,पिछ्डापन,छोटे शहरों की अनदेखी, न्याय में अपारदर्शिता,चारों तरफ़ फ़ैली हताशा,विदेशी ताकतों द्वारा गरीब किसानों,और राज्य सरकारों द्वारा विदेशियों को अपने देश की ऊपजाऊ भूमि का अधिग्रहण करने देने से,उनके द्वारा हमारी नदियों के भू-जल् का शोषण,कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा हमारी अर्थव्यवस्था में दखलंदाजी होने से चारों तरफ़ रोष बढ रहा है जिसके परिणाम स्वरूप एक ऐसे साम्राज्य का धीरे-धीरे देश में फ़ैलाव हो रहा है जिसका विस्तार ही आतंकवाद की संस्क्रति है। इस साम्राज्य का दूसरा नाम है " नक्सलवादा "

आईये एक नजर डालते हैं इसके बढ्ते फ़ैलाव और जन आक्रोश के कारण यह एक चिन्ता का विषय हो गया है इसका फ़ैलाव उत्तरांचल से बढकर केरल तक है। ये वो लोग है जो सिर्फ़ लूटनें और मारनें में विश्वास करते हैं. यह किसी भी सरकार के दबाव में नहीं रहते बल्कि इनके दबाव में सरकारें चलती हैं। उत्तरप्रदेश्,उत्तरांचल,बिहार,मध्य-प्रदेश,झारखन्ड,उडीसा,पं0 बंगाल,छत्तीसगढ,केरल,कर्नाटक,आन्ध्रप्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों के जंगलों में इसका व्यापक रूप में विस्तार है।
बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक ये नक्सलवादी अपने देश में अराजकता का माहौल बना रहे हैं किसी भी आदमी का दिन-दहाडे अपहरण,हत्या,लूट्-पाट,यॉ किसी भी सरकारी केन्द्र जैसेः पुलिस थाना,बैंक,रेलवे स्टेशन आदि लूटकर यॉ सरकारी खजाना लूटना इनके लिये दिनच्रर्या का कार्य है.किसी भी व्यापारी से फ़िरौती,धमकी यौ उनके जान-माल का नुक्सान करनें में भी ये नहीं चूकते !
राज्य सरकारों की पुलिस व खुफ़िया तन्त्र भी अपने आपको इनके आगे विवश पाता है क्योंकि ये लोग जनता में भी अपनी छवि अच्छी बनाये रखे हुये हें जनता में भी इनके गुप्तचर फ़ैले हैं।पुलिस भी कुछ नहीं कह सकती क्योंकि यॉ तो वे मार दिये जाते हैं यां फ़िर इनका सहयोग करने में ही अपनी भलाई समझते हैं

ये जो आप ऊपर चित्र में नक्सलियों का साम्राज्य अपने देश के नक्शे में देख रहे हैं उसकी भयावह स्थिति से सोचकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बढते आक्रोश और बेरोजगारी की समस्या,किसानों की भूमि अधिग्रहाण के विषय मे. अगर सरकार की नींद नहीं टूटी तो परिणाम और भी भयानक हों सकते हैं

1 Response to "बदलते भारत की एक भयावह तस्वीर"

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परमजीत बाली Says....

आप की चिन्ता स्वाभाविक है लेकिन इस सब के जिम्म्वार हमारे नेता ही हैं।