बुधवार, 19 दिसंबर 2007

गरीबी सिर्फ़ अमीरों के लिये है!

Posted on 1:50:00 pm by kamlesh madaan

अखबारों,समाचार चैनलों,ब्लॉग्स आदि में गरीबी का दुखड़ा रोकर मगरमच्छी आंसूं बहाने वाले ये लोग क्या किसी मायने में गरीब कहलाने के लायक हैं?,किस गरीब ने कोई ब्लॉग देखा है? और अगर देखा भी है तो उसे क्या मिला, किस जरूरतमंद को ये न्यूज चैनल वाले रोटियां बाँट रहे हैं और तो और ये लोग इस पर लिखकर वाह-वाही भी लूट रहें हैं.

क्यों कोई बिहार के लिये आगे नहीं आता, क्यों किसी को उड़ीसा नजर नहीं आ रहा, क्यों असम में गरीबों के ऊपर लाठियां चलाते वक्त हमारे देश के सभी चैनल उसे कवरेज नहीं देते अगर देते हैं तो उस नग्न लड़की के शरीर को!

देश चलाने वाले हमेशा से गरीबी हटाने के तमाम वायदे कर अपनी चुनावी जनसभायें और सत्ता की ओर मार्ग प्रशस्त करके आगे निकल जाते हैं और पीछे रह जाता है तो बस अवाक् खड़ा गरीब और लाचार इंसान जिसे अपने ठगे जाने का एहसास नहीं होता,

किस गरीब के पास सरकार की योजनाओं का लाभ पहुँचता है? यां ये कहिये कि किसी गरीब को सरकार ने ठेंगा दिखाने के अलावा क्या दिया.आज ठंड से ठिठुर रहे किसी गरीब को बीस एक राजनेताओं ने मिलकर एक शॉल क्या ओढा देते है तो वो पब्लिक की नजर और समाचार,पत्र-पत्रिकाओं के हीरो बन जाते है,किस गरीब के पास राशन-कार्ड होता है जबकि किसी अमीर के पास बैंक में खाता खुलवाने के लिये राशन कार्ड भी मिल जायेगा क्यों ?

राजनीते की दुकान चलाने वाले गरीबी का सौदा ही तो करते हैं जिससे बदलें वो विश्वस्तर के लूटखोर बन सकें ताजा उदाहरण दिलीप मंडल जी ने इस ब्लॉग पर दिया है.

क्या आप ये सोचते है कि आप ब्लॉग,समाचार और टी.वी. पर तो बहुत लिख लेते हैं पर जब कोई सचमुच का गरीब आपके द्वार खड़ा होता है तो फ़िर आप क्या करते है?

मैं भी आप लोगों में हूं लेकिन हम लोगों को भ्रष्ट होती सरकार और गरीबी का मजाक उड़ाते लेख लिखने के मोहपाश को छोड़कर किसी सच्चे लेखन की ओर जाना चहिये.

क्योंकि गरीबी के ऊपर लेख लिखने से टिप्पणियों की बौछार तो हो सकती है लेकिन गरीब के आंसू के रूप मे.

2 Response to "गरीबी सिर्फ़ अमीरों के लिये है!"

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आदित्य Says....

काफ़ी हद तक सच की बखिया उधेड़ी है आपने, सचमुच लिखने से कहीं ज्यादा करने से गरीबी हटेगी

अच्छा लेख अच्छी प्रस्तुति

आदित्य

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बाल किशन Says....

बहुत बढ़िया लिखा है सर आपने. आपके विचार अत्यन्त सराहनीय है. गरीबी का रोना रोते ब्लॉग लिखना और नेताओं का भाषण देना, दोनों एक ही बात है. ऐसे में नेताओं को बुरा कहने से पहले हमें अपने बारे में सोचने की जरूरत है.

बहुत उम्दा पोस्ट.