गुरुवार, 11 अक्तूबर 2007

आलोक पुराणिक जी! कम से कम अपनी जन्मस्थली की बुराई तो न करिये

Posted on 1:39:00 am by kamlesh madaan

आज सुबह ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के ब्लॉग पर आगरा के बारे में पढकर अच्छा लगा किन्तु साथ ही साथ आलोक पुराणिक जी के कमेंट देखकर दुख भी हुआ, उनके कमेंट में एक ओर जहाँ आगरा के प्रति उनकी निराशावादिता झलक रही है तो दूसरी ओर उनका आधुनिक होना भी निराश करता है क्योंकि आधुनिकता की जिस बयार में वह बह रहे हैं उसमें उन्होने अपनी तुलना मीर गालिब जैसे महान लेखक से कर दी है


उनकी टिप्पणी इस प्रकार हैः ALOK PURANIK said...
आगरा में महान लेखक भी पैदा हुए हैं। मीर गालिब और अपने बारे में अपने मुंह से क्या कहूं।
आगरा फोर्ट पे जाकर तो विकट नास्टेलजिया घेर लेता है, मैं वहां जाता ही नहीं। गर्म हवा फिल्म की शूटिंग भी वहीं हुई थी। आगरा फोर्ट आगरा शहर की गंदगी, घिचपिच, लदर पदर को रिप्रजेंट करता है, आगरा कैंट एक हद तक फौजियों के साफ-सुथरेपन का प्रतिनिधि है।
पर जी सच्ची का आगरा तो राजामंडी, सेठगली और रावतपाड़े, किनारी बाजार फौवारे में बसता है। आगरा की गलियां और गालियां नहीं झेलीं, तो फिर क्या आगरा दौरा पूरा न माना जायेगा।



शायद आगरा की ये चंद तस्वीरें उनके मन में पैदा हुयी कुछ दुविधा को दूर करेंगीं जिससे ये आगे वे अपनी जन्मस्थली के बारे में कुछ कहने से बच सकेंगें, नीचे की तस्वीरों में कहीं भी ताजमहल यां सैनिक क्षेत्र नहीं है जिसकी आप तारीफ़ कर सकें
ये चित्र् आम और सार्वजनिक स्थलों के हैं जहाँ आप परिवार सहित भ्रमण कर सकेंगें, अब दिल्ली मोह छूटे तब ना!


























5 Response to "आलोक पुराणिक जी! कम से कम अपनी जन्मस्थली की बुराई तो न करिये"

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अनूप शुक्ल Says....

आगरा की तस्वीरें देखकर अच्छा लगा। लेकिन आलोक पुराणिक की सहज टिप्प्णी में ऐसा कुछ नहीं जिससे यह कहा जाये कि वे अपनी जन्मभूमि की बुराई कर रहे हैं। जो उन्होंने देखा है वह बताया।

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Shiv Kumar Mishra Says....

भाई कमलेश जी,

आलोक जी ने अपनी टिप्पणी में अपनी तुलना मीर और गालिब के साथ की है, ऐसा मुझे नहीं लगता...एक व्यंगकार ख़ुद पर व्यंग कर रहा है...आप उसे समझने की कोशिश करें.

"आगरा फोर्ट पे जाकर तो विकट नास्टेलजिया घेर लेता है, मैं वहां जाता ही नहीं। गर्म हवा फिल्म की शूटिंग भी वहीं हुई थी।"

उनका ये कहना उनके आगरा के प्रति प्रेम को दर्शाता है....निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनका कमेंट समझें.

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Sanjeet Tripathi Says....

तस्वीरें अच्छी है कमलेश जी शुक्रिया!!

शायद आपसे चूक हो गई पुराणिक जी टिप्पणी का मर्म समझने में!

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Gyandutt Pandey Says....

कमलेश आपकी सेण्टीमेण्टालिटी की कद्र करता हूं। पर पुराणिक का व्यंगात्मक टिप्पणी लेखन एक अनूठी मस्ती भरा है - और वह भी शायद आगरा की देन है। उसे उस प्रकार से लेना चाहिये।
और व्यंगकार किसी जगह से नोस्टॉल्जिया की बात कर बैठे तो पता चलता है कि वह कितन अटैच्ड है।
आम तौर पर व्यंगकार नोस्टॉल्जिया जैसे फंसाऊ इमोशंस मे समय बरबद नहीं करता :-)

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बेनामी Says....

MAIN NAHI JANTA KI AAP KIS AGRA KI BAAT KAR RAHE HAI . LEKIN MAIN JIS AGRA KO JANTA HOON,WOH AGRA SHRESHT HAI,MODREN HOTE HUYE BHI USME PRACHEENTA KA SAMAVES HAI. AGRA DHEERE DHEERE,CHUPKE CHUPKE,APNE AAP KA SWAROOP BADAL RAHA HAI.AGRA JIS JAGAH GANDGI HAI TO DOOSRI TARAF SAAF SUTHRI COLONIES ,MARKETS.STREETS HAIN.EK BAAT AUR KEHNA CHAHUNGA KI KISI NAGAR KO ,KISI DESH KO COMPLETE YA PERFECT KARNA BADA HI MUSHKIL KAAM HAI PAR KOSIS KARTE REHNI JAROORI HAI.KIYNKI BADALNE MAIN WAQT TO LAGTA HAI.