गुरुवार, 3 अप्रैल 2008

मार्च माह का अवलोकन: अपना-अपना राग-भाग-एक

Posted on 3:33:00 am by kamlesh madaan

अपना-अपना राग -- जी हाँ ये ही शीर्षक इस माह के अवलोकन के लिये काफ़ी था क्योंकि इस मार्च माह में काफ़ी नये चेहरे और ब्लॉग्स देखने को मिले तो वहीं दूसरी ओर सभी ब्लॉगरो नें किसी विवाद को मुद्दा बनाये बगैर अपना राग अलापे रखा!

अब ये भी कह सकते है कि होली की खुमारी और फ़ाल्गुन की सौंधी खुशबू सभी लोगों के दिलो-दिमाग पर छायी हुयी थी खैर चलिये अब आगे चलें.....

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सबसे पहले इस माह की एक दुखद खबर से इस ब्लॉगजत को स्तब्ध कर दिया है वो खबर है अजय रोहिल्ला का हमारे बीच न होना! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे !

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नोट: इस बार का माह अवलोकन नये और समर्पित ब्लॉगरों,लेखकों के लिये है जिनका स्वागत है इस ब्लॉगजगत की दुनिया में, क्योंकि हिन्दी का लेखन-मोह उन्हें स्वतः इस चिट्ठाजगत में खींच लाया है और सबसे बड़ी खुशी की बात है वो अपनी बात आगे रखकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं,मैं ये नहीं कहता कि हमारे पुराने और वरिष्ठ लेखक इस अवलोकन में नहीं हैं,बल्कि ये कहना चाहूँगा कि हम सभी लोगों का प्रोत्साहन इन नवागत लेखकों का उत्साहवर्धन करता रहेगा जो जरूरी भी है

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शुरूआत हमारी सबसे वरिष्ठ अनीता कुमार जी की लिखी पोस्ट चक दे रेलवे लिखी जो फ़रवरी के बाद मार्च माह की अच्छी शुरूआत लेकर आयी क्योंकि उसके पहले कुछ घंटे तक मोहल्ला-भड़ास का शीतयुद्ध खत्म हुआ था और फ़ायर ब्रिगेड अपना-अपना-अपना काम कर रही थी,

अब आगे....

मार्च माह की ताजगी और स्फ़ूर्ति लिये कुछ नये चेहरे हमारे सामने आये हैं जिनसे इस ब्लॉगजगत में नयी ऊर्जा का संचार प्रतीत हो रहा है! आइये कुछ नजर भर देखें इनको..........सबसे पहले मारवाड़ी समाज के हाथ धोकर पड़े हमारे शम्भूनाथ जी
के ब्लॉग पर चलते हैं,उनके शोध के लिये उन्हे मारवाड़ी समाज रक्षक का नोबेल भी मिल सकता है :D





बहुत कम लेकिन अच्छा लिखने वाले पल्लव चाय-चिंतन करते नजर आते हैं तो मन में खुशी हो जाती है कि चलो भारत भर में सबसे ज्यादा पीने वाले पेय चाय के साथ कोई नयी बात पढने को मिलेगी! चाय के समय ये गिरिराज जी
का ऑफ़-मूड क्यों हो रहा है, समझ नहीं आता. चलो उनका मूड ठीक करते हैं कुछ कनफ़ुसिया कर ! क्या कहा कनफ़ुसिया? जी हाँ रमेंद्र जी
धीरे से कनफ़ुसिया रहे हैं आप भी कनफ़ुसिया लीजिये साहब!



इस माह कुछ नयी बल्कि ये कहना चाहूँगा कि बहुत सी नयी महिला ब्लॉगर्स ने हिन्दी चिट्ठाजगत में दस्तक दी है जो ब्लॉगजगत मे उनके बढते दायरे को दर्शाती है..

रश्मि जी < रूप-अरूप >



स्वाती जी
< स्वाती >



शोभा जी
< अनुभव >


रक्षंदा खान जी
< pretty women >नाम के अनुरूप खूबसूरत भी हैं


लोकरंग बिखेरती प्रतिमा जी
भी हैं तो कहीं दूसरी ओर रंगबिरंगी टोपी लगाये अपनी लहरों में खोई पूजा जी
भी हैं.
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इस माह की प्रमुख घटनायें:-- 1. इस माह में नारद और भड़ास का मिलन कुछ चटपटा लगा, अब बेंगाणी भाई और यशवंत भाई का मिलन इस माह की एक्सक्लूसिव खबरों में ही गिना जायेगा ना!

2. दूसरी बड़ी घटनाओं में एक यह कि इस माह पंगेबाज भाई सहब कुछ होली की मस्ती में ज्यादा पगला गये हैं, कभी तो वो अपने आपको हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर(पंगेबाज) बना देते हैं तो कभी अपने आप को गिनीज बुक का प्रशस्ति पत्र देकर बच्चों जैसे मन बहला लेते हैं लेकिन पंगेबाजियां छूटे नहीं छूटती! भाई पंगेबाज जो ठहरे

भाई शिव जी तो बेचारे दुर्योधन के पीछे नहा-धोकर ही लग लिये हैं, बिना कॉपीराइट करवाये दुर्योधन अपनी डायरी लिखकर आज पछता रहा होगा क्योंकिं जितने पन्ने उस डायरी में हैं मेरा ये अनुमान है उतने पन्नों की रॉयल्टी से ही एक और हस्तिनापुर बन सकता था! बेकार में एक महाभारत हुआ

3. उड़नतश्तरी आगरा से होकर गुजर गयी ये एक अदभुत घटना थी मुझ जैसे एक छोटे से ब्लॉगर के लिये क्योंकि समीरलाल जी को पकड़ना कोई बच्चों का खेल नहीं
तो वहीं दूसरी ओर यशवंत भाई अहमदाबाद,मुम्बई और दिल्ली में बिना उड़नतश्तरी के हवाई-जहाज में उड़ रहे थे जानकर अच्छा लगा.

बस! अब और आगे नहीं लिखा जा रहा है काफ़ी लम्बी पोस्ट हो जायेगी, इसके लिये मुझे इसके कई भाग बनाने पड़ रहे हैं तो आप कुछ भागों में इस अवलोकन को देखेंगें

5 Response to "मार्च माह का अवलोकन: अपना-अपना राग-भाग-एक"

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Gyandutt Pandey Says....

बहुत रस ले कर लिखा है आपने। और ऐसा लिखा सार्थक होता है।

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तेताला Says....

ऐसे अवलोकन
प्रतिमाह किए जाएं
तो प्रेरणा और प्रसाद
प्रोत्‍साहन प्रदान करेगा.
- अविनाश वाचस्‍पति

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Shiv Kumar Mishra Says....

आपका अवलोकन शानदार रहा...

कमलेश जी, वैसे कुछ लोग कहते हैं कि मैं दुर्योधन के पीछे केवल हाथ धोकर पडा हूँ..और आपको जानकारी दे दूँ..इस डायरी का कॉपी राईट्स अरुण अरोरा जी के पास है...अभी तक मैंने इस डायरी से शायद सात पेज पब्लिश किए हैं...हर पेज के लिए अरुण जी को रायल्टी देनी पड़ती है.....:-)